राज्य पक्षी दूधराज का सर्वे करेंगे विभागीय अधिकारी 
August 17, 2019 • Yogesh Sharma

सर्वे का काम निजी हाथों में सौंपने पर केंद्र ने लगाई रोक
भोपाल। प्रदेश के वन विभाग के अधिकारी अब राज्य पक्षी घोषित किए गए दूधराज का सर्वे करेंगे। केंद्र सरकार ने यह कहते हुए सर्वे के लिए राशि देने से इनकार कर दिया कि अध्ययनकर्ता अध्ययन करके चले जाएंगे और विभाग को सिर्फ एक रिपोर्ट मिलेगी।

इसलिए यह काम विभागीय अफसरों से कराया जाना चाहिए। इस आधार पर विभाग से दोबारा प्रस्ताव मांगा गया है। वन विभाग को अभी यह भी पता नहीं है कि मध्य प्रदेश में इस पक्षी की कितनी संख्या है और यह किन क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाता है। हाल ही में विभाग ने इस पर अध्ययन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। विभाग यह काम निजी संस्था से कराना चाहता था और इसके लिए कैंपा फंड से राशि की मांग की गई थी, जिसे केन्द्र ने अस्वीकार कर दिया है। सूत्रों की माने तो दूधराज की संख्या, रहन-सहन को लेकर प्रदेश में पहली बार अध्ययन का प्रस्ताव तैयार हुआ है। अब वन विभाग के अफसरों से अध्ययन कराने का दूसरा प्रस्ताव मांगा गया है।


  मामले में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का तर्क है कि वन अफसर अध्ययन करेंगे, तो विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को इसका ज्ञान होगा और वह सतत रूप से आगे बढ़ेगा। जिसका फायदा विभाग को मिलेगा। जबकि अध्ययनकर्ता तय समय में अध्ययन कर रिपोर्ट सौंप जाएंगे और आगे उनकी जरूरत पड़ती रहेगी। ऐसे में विभाग के अफसरों को ज्ञान नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि दूधराज को 1985 में मध्य प्रदेश का राज्यपक्षी घोषित किया गया है।वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में दूधराज को कम चिंता वाले पक्षियों की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि पक्षी प्रेमी बताते हैं कि यह पक्षी आमतौर पर मप्र के सभी संरक्षित क्षेत्रों (नेशनल पार्क, अभयारण्य) में मिल जाता है, लेकिन आसानी से देखने को नहीं मिलता है। इसलिए यह कहना कतई उचित नहीं होगा कि यह प्रजाति पूरी तरह से सुरक्षित है और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। करीब 34 साल पहले राज्य पक्षी घाषित दूबराज पक्षी को लेकर वन विभाग के पास अब तक कोई विशेष जानकारी नहीं है।