(ई-टेंडरिंग घोटाला) रिमाड पर चल रहे आरोपियो से हो रहे चोकांने वाले खूलासे, भाजपा नेताओ मे बढी बेचैनी विभागो के तत्कालीन पमूख सचिव ओर पूर्व मंत्रियो से की जा सकती है पूछताछ
April 13, 2019 • Yogesh Sharma


भोपाल। राज्य की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने लंबी जांच के बाद ई-टेंडरिंग घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के साथ ही ऑस्मो कंपनी के तीन अधिकारियो को गिरफ्तार कर उन्हे रिमांद पर लिया है। सुत्रो का कहना है की ईओडब्ल्यू की जाँच ने संघ और बीजेपी की टेंशन.
बढा दी है। सुत्रो का दावा है की ऑस्मो कपंनी के शिकंजे मे आये ऑस्मो आईटी साल्यूशन के आरोपी डायरेक्टर आरोपी विनय चौधरी, सुमित गोलवलकर और वरुण चतुर्वेदी से पूछताछ मे कई चोकाने वाले खूलासे हो रहे है।

पूछताछ में संघ और बीजेपी के बड़े नेताओ से अपने कनेक्शन की बात कबूली है। वही यह भी बताया जा रहा है की रिमाड पर चल रहे आरोपी सुमति गोलवलकर और उसके साथियों के संघ पदाधिकारियो हिन्दू जागरण मंच से करीबी रिश्ते रहे है, वो हिन्दू जागरण मंच और आरएसएस के विचारों को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कैम्पेनिंग किया करता था। बताया जा रहा है की अपने इसी राजनीतिक कनेक्शन के चलते ऑस्मो कम्प्यूटर को करोड़ों के ठेके मिले थे। गोरतलब है की ईओडब्ल्यू ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनियों के संचालक समेत संबंधित विभागों में तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारी एवं नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है।

वही तीनो आरोपियो से पूछताछ के साथ ही अब जांच एजेंसी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी के समय विभागों के प्रमुख सचिव रहे अधिकारी एवं मंत्रियों से भी पूछताछ कर सकती है। सूत्रो का कहना है की इसके लिए ईओडब्ल्यू की ओर से नोटिस भेजने की तैयारी कर ली है। गोरतलब है की ई-टेंडरिंग में गड़बड़ी को लेकर आधा दर्जन विभागों के नाम सामने आए हैं। जिसमें जल संसाधन, लोक निर्माण विभाग, पीएचई, मप्र सड़क विकास निगम, जल निगम आदि विभाग शामिल हैं। शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुई ईं-टेडरिंग प्रक्रिया में गड़बडी मामला करीब 6 महीने पहले आया था। तब सरकार ने जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी थी।

जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने तीन दिन पहले ही निजी फर्मों के संचालक समेत अज्ञान अधिकारी एवं राजनेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। अब ई-टेंडरिंग में गड़बड़ी को लेकर संबंधित फर्म संचालक, अधिकारी एवं नेताओं को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। वही ई-टेंडरिंग में एफआईआर होते ही शिवराज सरकार में मंत्री रहे भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले दो दिन के भीतर पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले, नरोत्तम मिश्रा, रामपाल सिंह समेत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि ई-टेंडरिंग में गड़बड़ी के समय कुसुम मेहदेले पीएचई, नरोत्तम मिश्रा जल संसाधन, रामपाल सिंह लोनिवि के मंत्री रहे हैं। मेहदेले ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाए हैं।